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जागरण जंक्शन के मंच पर प्रेम की बकवास

Posted On: 11 Feb, 2011 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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नमस्कार दोस्तों…. एक बार फिर से आपके बीच मै इस मंच पर चल रही प्रेम प्रतियोगिता के चलते…. प्रेम पर बक बक करने हाज़िर हूँ….

तो जनाब जागरण जंक्शन ने यह प्रतियोगिता क्या प्रारंभ की …. इस मंच पर सभी ब्लॉगर प्रेम के पुजारी नज़र आने लगे… हर पुरुष ब्लॉगर कान्हा और हर स्त्री ब्लॉगर राधा बन चुकी है…. और एक क्रान्तिकारी परिवर्तन इस प्रतियोगिता के चलते आया…. कई भूले बिसरे भटके ब्लॉगर पुरूस्कार की उम्मीद में फिर से मंच में कूद गए हैं…. वो तो शुक्र है जागरण जंक्शन वालों ने मंच की मजबूती का ध्यान रखा है नहीं तो सब धडाम हो जाते….

और मजा तो यह है कि अनेक ब्लॉगर अपनी लम्बे अंतराल के बाद इस उपस्थिति पर तर्कयुक्त बहाने प्रस्तुत करते नज़र आये…. अरे भाई आ गए हो तो स्वागत है…. बहाने क्यों बनाते हो…. ये बहाने ही तो आपके मन कि नब्ज़ बताते हैं…. खैर दोस्तों धन्यवाद जागरण जंक्शन का जिसने इन सब बिछड़ गयी गोपियों को एकत्र किया…. और अब ये सब गोपियाँ पहले से हाज़िर गोपियों के साथ मिलकर उद्धव को ताना मारने का कार्य बखूबी निभा रही हैं…. और जागरण जंक्शन का यह पावन मंच प्रेम कि बक बक झक झक से ओत प्रोत हुआ जा रहा है….

जहाँ जाओ प्रेम के ही झोंके…. भाई राजकमल जी इन झोंकों में आपको भी कोई मिल जाये… हम तो यही उम्मीद करेंगे. अब भाई पियूष भी भागने कि नहीं सोच रहे होंगे… मंच पर जब करोड़ों टन प्रेम कि वर्षा हो रही है तो कोई कैसे भाग सकता है.

तो दोस्तों… कुल मिला कर मंच पर छा रही खुमारी का मजा भी बहुत आ रहा है… कहीं प्रेम पर आध्यात्मिक लेख हैं…. तो कहीं प्रेम की विषद और गूढ़ परिभाषाएं …. कहीं प्रेम पर विरह व्यथा का प्रस्तुतीकरण है…. तो कहीं पड़ोसियों के प्रेम प्रसंगों को छापा जा रहा है (हो सकता है अपनी ही कहानी को पड़ोसियों के नाम से छापा जा रहा हो)..कहीं पद्य है तो कहीं गद्य…. कोई अपनी प्रेम की पाती को ही सार्वजनिक किये दे रहा है….. तो कोई अपनी ही प्रेम कथा छापे दे रहा है….

भाई ये किंग और क्वीन बनने के चक्कर में जो बन पड़े वो हथकंडे अपनाये जा रहे हैं… और तो और अपने वाहिद भाई गाना गा रहे हैं…. प्रतिक्रियाओं का दौर चल पड़ा है…. मुझ जैसे ब्लॉगर को भी आजकल थोक के भाव प्रतिक्रिया मिलने लगी है…. चलो भाई अपन भी बहती गंगा में हाथ धो लें… अब पियूष भाई को देख लो इतनी व्यस्तताओं के बावजूद भी एक लेख और ५० प्रतिक्रियाएं छाप ही देते हैं…. राजकमल भाई भी गंभीर नज़र आते हैं…. सभी ब्लोगर बदले बदले नज़र आ रहे हैं….

तो दोस्तों यह है प्रेम की ताकत… अच्छे अच्छों को बदल देती है…. यकीं न हो तो १५ फरवरी से इस मंच पर आकर देखना…. वही पुराने चावल शेष रहेंगे… और तो और जागरण जंक्शन को भी लगता है प्रेम की खुमारी चढ़ गयी है…. आजकल तो हर फटीचर से फटीचर ब्लॉग को भी फीचर्ड किये दे रहा है…. अरे भाई इस भागमभाग में अपनी तो निकल ही पड़ी सारे के सारे पोस्ट फीचर्ड हो गए… अपने को इतराने का मौका मिल गया भाई अपनी गली के सबसे बड़े लेखक जो हो गए हैं.

आदरणीय ब्लॉगर बंधुओं मेरी बात का बुरा मत मानियेगा…. समय की कमी की वजह से जिन दोस्तों के नाम नहीं ले सका हूँ वो भी एक से बढ़कर एक हैं…. कुछ एक के तो नाम भी याद आ रहे हैं लेकिन डर के मारे नहीं ले रहा हूँ…. आलराउंडर जी… चातक जी…. रौशनी जी…. निशा जी… खुराना जी… धर्मेश जी…. देहाती भाई…. अबोध जी…. निखिल भाई…. आकाश तिवारी जी…. अलका जी…. राजेंद्र जी…. अरविन्द जी….. और अन्य सभी दोस्तों को मेरी ओर से अच्छे विचारों को मंच पर उठाने के लिए साधुवाद… और किंग या क्वीन बनने के लिए शुभकामनायें….

दोस्तों हम सभी का प्रयास यही होना चाहिए की सब लोग इस बात को समझें की किसी दिन का महत्व नहीं है…. यह तो प्रतीक मात्र है…. महत्व यदि है तो प्रेम का है…. अतः वैलेंटाइन डे हो या ना हो यह महत्वपूर्ण नहीं है…. महत्वपूर्ण है प्रेम का होना…. रही बात प्रतियोगिता की… तो मित्रों किंग या क्वीन बनाना इस प्रतियोगिता का उदेश्य नहीं है… इसका उद्देश्य है सभी ब्लोग्गर्स का एक ही विषय पर चर्चा करना जिससे इस प्रेम विषय पर सार्थक चर्चा हो सके…. विचारों का मंथन हो सके…. और परिणाम रूपी अमृत प्राप्त हो सके…. इस सम्बन्ध में मै यही कहना चाहता हूँ की जागरण जंक्शन की यह मुहीम मुझे सफल होती प्रतीत हो रही है…. और इस हेतु जागरण जंक्शन बधाई के पात्र हैं…. साथ ही साथ आप सभी ब्लॉगर मित्र भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने इस स्वस्थ स्पर्धा में बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग किया है और कर रहे हैं…. यह बहुत जरुरी है…. की हम आपने विचारों को मंच पर रखें…. इससे ही किसी दिशा में जाने में मदद मिलेगी…. आप सभी को मेरी और से पुनश्च शुभकामनायें …..

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72 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

V M Sati के द्वारा
February 15, 2011

हिमांशु जी बहुत सुंदर हास्य लेख लिखा है. आपको बधाई है. http://vishwamohansati.jagranjunction.com/

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 17, 2011

    सती जी…. नमस्कार….. मै आपके दिए लिंक पर गया था लेकिन वहां पर कोई भी पोस्ट नहीं है….. आपकी प्रतिक्रिया हेतु आभार….

Devendra S Bisht के द्वारा
February 15, 2011

सर जी क्या लिखा है पेट मैं दर्द हो गया हँसते हँसते

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद….. देवेन्द्र जी…. चलिए आपको यह पोस्ट पसंद तो आया…..

Preeti Mishra के द्वारा
February 14, 2011

हिमांशुजी मुझे तो यह सोचकर राहत महसूस हो रही है कि कल से प्रेम के अलावा किसी अन्य विषय पर भी ज्ञानवर्धक जानकारियां प्राप्त होंगी.

    Preeti Mishra के द्वारा
    February 14, 2011

    जब किसी प्रतियोगिता के लिए कोई विषय दिया जाता है तो ज्यादा से ज्यादा ब्लॉगर उस ही विषय पर लिखना चाहते हैं जबकी वह अन्य विषयों पर ज्यादा अच्छा लिख सकते हैं.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद प्रीती जी….. इस पोस्ट पर आपका स्नेह प्राप्त हुआ……

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    जी हाँ प्रीती जी एक ही विषय पर प्रतियोगिता से हमें उस विषय की गहराई का आभास तो हो ही जाता है….

February 14, 2011

हिमांशु जी, बडे प्रेम से ज्यादातर ब्लागरों की खबर आपने ली हॆ.अच्छे लेख के लिए बधाई. मेरे जॆसे कई बच गये.ठीक हॆ किस्मत अपनी अपनी-अपनी.भट्ट जी तॆयार रहना होली में-हमने भी अपनी पिचकारी तॆयार कर ली हॆ.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद विनोद जी होली का इंतज़ार रहेगा…… आपका बहुत बहुत आभार…..

VIPIN C. JOSHI के द्वारा
February 14, 2011

हिमांशु जी, एक बहुत ही एक अछे लेख तथा मुद्दे पर लिखने के लिए आपको बधाई…..आपने बिलकुल ही ठीक लिका है की हम सभी का प्रयास यही होना चाहिए की सब लोग इस बात को समझें की किसी दिन का महत्व नहीं है, यह तो प्रतीक मात्र है…. महत्व यदि है तो प्रेम का है अतः वैलेंटाइन डे हो या ना हो यह महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है प्रेम का होना…..आपको बधाई तथा प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाये……

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    जोशी जी…. सर्वप्रथम आपका इस मंच पर स्वागत है…. आपकी रचनाएँ भी बेहतरीन हैं….. आपका बहुत बहुत आभार…..

chaatak के द्वारा
February 14, 2011

स्नेही हिमांशु जी, आपकी पोस्ट पढ़कर बड़ा आनंद आया| प्रतियोगिता के बहाने ही सही नए पुराने, भूले बिसरे सारे ब्लागरों को मंच पर एकत्रित होते देखकर अच्छा लगा| अच्छे सन्देश के साथ बेहतातीं कमेंट्री काफी पसंद आई| बधाई!

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    चातक जी आपको मेरी कमेंट्री पसंद आई इस हेतु आपका आभार…… चातक जी कल आपका एक पोस्ट देखा था लेकिन वह बहुत कम समय के लिए फीचर्ड रहा… व्यस्तता के कारण अभी पढ़ नहीं पाया हूँ…. लेकिन JJ की इसी निति की ओर मैंने ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया था…. उसके बाद जो पोस्ट फीचर्ड हुए वे लम्बे समय तक हैं…. इसका कारण क्या है…..

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 14, 2011

हिमांशु जी सादर नमस्कार,चलिए चाहे कांटेस्ट के बहाने ही सही प्यार पर इतनी चर्चा तो हुई,वाक्य्यी इसके लिए जागरण जंक्सन धन्यवाद का पात्र है जिसने ऐसा नेक कार्य किया,कंटेस्ट की मेरे तरफ से सबको बधाई,धन्यवाद!

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    नमस्कार धर्मेश जी…. आपका बहुत बहुत धन्यवाद…. जी हाँ धर्मेश जी JJ निश्चित रूप से धन्यवाद का पात्र है…..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    मेरी ओर से भी जागरण जंक्शन के सभी ब्लोग्गेर्स को कांटेस्ट की शुभकामनाएं…..

Versha के द्वारा
February 13, 2011

हा हा ही ही हाँ हिमांशु जी ,आप सही बोल रहे है अगर जागरण वाले मुझे कांटेस्ट का बहाना नही देते तो सच में ,मेरी डायरी की कविता ,कभी ब्लॉग तक नही आती में जीतू या न जीतू ,फिर भी , मुझ जैसी कई डायरी-कवयित्रीयों की तरफ से आज में जागरण मंच को धन्यवाद जरूर कहूँगी

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    धन्यवाद वर्षा जी…. आपको मेरा यह प्रयास पसंद आया……

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    वर्षा जी…. निश्चित ही जागरण जंक्शन धन्यवाद का पात्र है…. जिसके प्रयासों से अनेक नए ब्लोगेर इस मंच पर आये हैं…. इससे अनेक नए विचारों का इस मंच पर आगमन होगा…. लेकिन एक बात मै यहाँ पर कहना चाहूँगा की जब आप सार्वजानिक मंच पर कुछ लिखते हैं तो आप को लेखन का दायित्व और कर्तव्य भी समझने चाहिए…. और JJ को इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए…. इस बाबत मै एक विस्तृत पोस्ट शीघ्र ही प्रस्तुत करूँगा…. आप उसका भी एक अवलोकन अवश्य करियेगा….

nishamittal के द्वारा
February 13, 2011

हिमांशु जी कोई बात नहीं प्रेम की मिठास अनुभव करने कराने के लिए जागरण ने ३२ घंटे का समय और दिया है इसके बाद अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग अलग अलग फील्ड में बजना ही है.शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद.मुझको लगता है जागरण पर शनिवार रात में पोस्ट डालनी चाहिए २६ घंटे से बदलने वाले छुट्टी पर हैं शायद.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 13, 2011

    आदरणीय निशा जी…. प्रणाम…. इस पोस्ट पर आपकी प्रतिकिरिया मिली… इस हेतु आपका तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ… मैंने इस पोस्ट में यही बात उठाई है की… जो पोस्ट फीचर्ड हो रहे थे उनमे से कुछ तो पल भर में हटा दिए जा रहे थे और कुछ घंटों बने हुए थे… यह कुछ जस्टिफाई प्रतीत नहीं हो रहा था… अब शायद JJ को गलती प्रतीत हुई है… खैर यह पोस्ट मैंने कोई नाराजगी जताने के लिए नहीं लिखा था… और न ही JJ को उसकी गलती बताने के लिए यह तो एक हास्य था आप सबके मनोरंजन के लिए… यदि किसी की भावनाओं को मेरे लेख से ठेस पहुंची हो तो क्षमा चाहूँगा… निशा जी एक बार पुनः आपका आभार…..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 15, 2011

    निशा जी एक जानकारी और देना चाहूँगा की मैंने यह पोस्ट शनिवार देर रात को नहीं… अपितु शुक्रवार को लगभग ७ बजे शाम को पोस्ट किया था…. हो सकता है… यह जानकारी अन्य पाठकों के भी काम आये… जिनके पोस्ट अल्प समय के लिए ही फीचर्ड हो पा रहे हैं…..

Bhagwan Babu के द्वारा
February 13, 2011

हा…………. हा……….. हा……….. क्या बात है क्या तडका लगाया है http://bhagwanbabu.jagranjunction.com/2011/02/13/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%ae-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%88-%e2%80%93-valentine-contest/

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 13, 2011

    भगवान् बाबू…. आपका आभार…..

Harish Bhatt के द्वारा
February 13, 2011

हिमांशु जी प्रणाम, लेख के लिए हार्दिक बधाई. प्यार के मौसम में जब हवाओ में प्यार की खुशबू तैर रही हो तो जंक्शन कैसे अछूता रह सकता है. यहाँ जंक्शन पर हर कोई अपनी समझ और योग्यता के मुताबिक लेख और कविताओं से प्यार की बौछार कर रहा है. बस आप भी कुछ दिन इन प्यारी बौछारों में भीग कर प्यार का मजा लीजिये. मौसम बदलते ही प्यार की बरसात बंद हो जाएगी क्योकि और भी मौसम है मतलब प्यार से जरुरी और काम है करने के लिए बस यह बरसात ख़त्म तो आगे कुछ नया शुरू करे.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 13, 2011

    नमस्कार हरीश जी…. इस पोस्ट पर आपका स्नेह मिला… आपका आभार व्यक्त करना चाहूँगा….

February 12, 2011

हिमांशु जी अच्छी टांग खिंचाई की है आपने. आपको फिर से एक बार शुभकामनाएं.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 13, 2011

    राजेन्द्र जी…. आपका बहुत बहुत आभार….

nikhil के द्वारा
February 12, 2011

हिमांशु भाई, आपने तो लाजवाब कर दिया मुझे. बेहतरीन व्यंग्य. इश्वर करे आपकी कलम की धार यूँही बने रहे. आभार, निखिल झा

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    निखिल जी…आपका बहुत आभार….

Ramesh bajpai के द्वारा
February 12, 2011

हिमांशु जी दोष ब्लागरो का नहीं ऋतुराज का है यह बासंती झोके हर किसी को धकिया कर कुछ न कुछ निकलवा रहे है आपको हार्दिक शुभ कामनाये बधाई

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    धन्यवाद बाजपेयी जी….. आभार.

R K KHURANA के द्वारा
February 12, 2011

प्रिय हिमांशु जी, सुंदर हास्य लिखा है ! इस प्रतियोगिता के बहाने कई नए नए लेखक भी प्रकाश में ए है ! जो की एक अच्छी शुरुवात है ! अच्छे लेखे के लिए बधाई आर के खुराना

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    जी हाँ खुराना जी…. यह एक अच्छी शुरुआत है… आपका मेरे इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने हेतु हार्दिक आभार………

roshni के द्वारा
February 12, 2011

हिमांशु जी इस प्रतियोगिता के द्वारा सबने कुछ न कुछ लिखा और इस बहाने jj पर काफी चहल पहला हो गयी एक मेला सा लगा है …. आपका हास्यव्यंग बहुत अच्छा लगा

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    रौशनी जी…. नमस्कार…. आपको मेरी यह रचना पसंद आई इस हेतु मै आपका शुक्रिया अदा करता हूँ… इसी प्रकार सहयोग देते रहिएगा…. आभार.

div81 के द्वारा
February 12, 2011

आदरणीय हिमांशु जी, बदले हुए तेवर और बदले हुए क्लेवर में पोस्ट लिखी है | maja आया पढ़ कर और जानकार की कैसे कैसे पोस्ट ko फीचर्ड किया जागरण ने | ये तो जागरण जन्ग्शन भी प्यार मयी हो रखा है आप सिर्फ Valentine कांटेस्ट- लिखकर भी पोस्ट करेंगे वो पोस्ट फीचर्ड हो जायेगा | प्यार का सागर बहा रहा है कोई हाथ धो रहा है कोई डुबकी पर डुबकी …………..शुभकामनाओं के साथ |

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    जी हाँ दिव जी…. आपने सही कहा की सिर्फ वैलेंटाइन कांटेस्ट लिख कर भी पोस्ट कर दें तो वह फीचर्ड हो जाएगा… आखिर जागरण जंक्शन भी प्रेम में अँधा हो चूका है… और सावन के अंधे को हरा ही हरा दीखता है…. खैर दिव जी यह सब एक हास्य रचना का एक भाग था… और मेरा किसी के लेख की ओर कोई इशारा भी नहीं है…. आपको और जागरण जंक्शन को मेरा यह प्रयास पसंद आया यही मेरा पुरूस्कार है… आप सभी पाठकों और जागरण जंक्शन का बहुत बहुत आभार… इसी प्रकार उत्साह वर्धन करते रहिएगा…..

priyasingh के द्वारा
February 12, 2011

अच्छा ही तो है हिमांशु जी की हर कोई प्रेम का ही पुजारी बन रहा है नफरत का नहीं …हर कोई किशन और राधा ही बन रहे है ओसामा और दाउद नहीं ……. agar कोई apni प्रेम पाती या प्रेम कथा लिख रहा है तो वो उसे सार्वजनिक नहीं कर रहा वरन अपने हिस्से का प्रेम है जो सबको बाँट रहा है इस प्रेम रुपी उत्सव में हर कोई पुरस्कार के लिए नहीं है यह प्रेम रस है ही ऐसी चीज़ की हर कोई भीग जाना चाहता है ………अच्छा लेख ……

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    प्रिया जी …. आपने इस पोस्ट पर अपनी राय रखी इस हेतु आपका आभार प्रकट करना चाहूँगा… मेरे लेख का उद्देश्य किसी को हतोत्साहित करने का बिलकुल नहीं था… अपितु एक हास्य व्यंग्य लिखना था… जो की मैंने पहली बार लिखा है… यदि आपको कोई बात बुरी लगी हो… या मेरे लेखन में कोई त्रुटी हो तो अवश्य सूचित करियेगा… आपके सहयोग एवं स्नेह का सदैव आकांक्षी रहूँगा….. धन्यवाद.

allrounder के द्वारा
February 12, 2011

हिमांशु जी, बड़ा ही धांसू लेख लिख डाला जनाव आपने तो, मजा आया बहुत से मनोविज्ञान उजागर कर दिए भाई ब्लोगर्स Association के ! बधाई !

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    नमस्कार सचिन जी…. आपका इस पोस्ट पर समर्थन मिला …. बहुत बहुत आभार….

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 12, 2011

वाह हिमांशु भाई, आज तो मिज़ाज और तेवर दोनों ही बदले हुए नज़र आ रहे है|मुझे भी लपेट डाला आपने तो|जो भी हो बड़ा मज़ा आया ये हसीन बदलाव देख कर| आभार सहित,

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    वाहिद जी… नमस्कार…. आपको मजा आया तो फिर सब ठीक है…. आपका बहुत बहुत आभार………

razia mirza के द्वारा
February 12, 2011

जोर का झटका जोर से लगा भैया!! क्या गिन गिनकर मारा है? वाह!!! शुभकामनाओं के साथ |

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    रज़िया जी…. नमस्कार…. बहुत डरते डरते पोस्ट किया था यह लेख…. कहीं मुझे ही झटका न लग जाये… लेकिन अब सब नोर्मल लग रहा है…. आपका मनोबल बढ़ने के लिए शुक्रिया….

alkargupta1 के द्वारा
February 12, 2011

हिमांशु जी , आकाश जी की प्रतिक्रिया का मैं भी समर्थन करती हूँ आपके अभी तक इस विषय पर लिखे गए सभी लेखों से हट कर बहुत ही ज़ोरदार है…. बधाई ! प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं !

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    धन्यवाद अलका जी…. आपकी सुंदर प्रतिक्रिया एवं सहयोग हेतु…. आभार……………………………………

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 12, 2011

श्री हिमांशु जी, आपका लिखा ये लेख लीक से हटकर जरूर है..मगर बहुत ही दमदार आवाज है इस लेख में… आकाश तिवारी

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    धन्यवाद तिवारी जी…. आपको लेख पसंद आया…. यह मेरा सौभाग्य है… आभार……

Deepak Sahu के द्वारा
February 12, 2011

हिमांशु जी! 14 के बाद दिखा जाएगा कौन बचता है और कौन निकलता है! कांटेस्ट की ढेर सारी शुभकामनाएँ! http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/2011/02/09/valentine-contest/

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    दीपक भाई…. कंही आप नाराज तो नहीं हो गए?…. पहली बार व्यंग्यात्मक लेख लिखने का प्रयास था यह मेरा…. आपको भी हार्दिक शुभकामनायें….

Amit Dehati के द्वारा
February 12, 2011

आदरणीय हिमांशु जी प्रणाम ! बहुत सुन्दर लेख . बिल्कुल सही फ़रमाय आपने ….१५ फेब से वहीँ पुराने चावल …….. बहुत सुन्दर //…..बधाई कांटेस्ट की ढेर सारी शुभकामना ! http://amitdehati.jagranjunction.com/2011/02/09/%E0%A4%87%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%B8-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%86-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE/

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    अमित जी…. नमस्कार…. आपका बहुत शुक्रिया….

rajkamal के द्वारा
February 11, 2011

प्रिय हिमांशी जी …नमस्कार ! आप ने तो मेरी रोज़ी रोटी को ही सांझा कर लिया है …… जो बाते आपने अब अपने इस लेख में कही है उनमे से कुछेक बाते मैंने अपने लेख में इस कांटेस्ट की समाप्ति पर कहनी थी ….. बहुत ही बढ़िया , वाकई फीचर्ड होने के काबिल है यह लेख …. मेरे सुंदर भविष्य की शुभकामनायो के लिए आपका आत्मिक आभार ….. आपको इस प्रतियोगिता के लिए बहुत -२ शुभकामनाये

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    राजकमल जी… नमस्कार… माफ़ कीजियेगा रोजी रोटी…. ऐसी कोई बात नहीं है… बस मूड आया लिख दिया…. अब आपकी तारीफ मिली है तो दिल गद गद हो रहा है… आप जितना बढ़िया लिखते हैं इस शैली में … मै वह तो नहीं कर सकता… लेकिन यह जरुर है की… आपके लेखन से ही प्रेरणा लेकर मैंने यह हिमाकत की है… आपके सहयोग एवं स्नेह के लिए मै आपका हार्दिक आभारी हूँ…. आपना स्नेह बनाये रखियेगा और इसी प्रकार उत्साह बढाते रहिएगा…. धन्यवाद……

rita singh \'sarjana\' के द्वारा
February 11, 2011

हिमाशु जी , बहुत बढ़िया ………. बधाई

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    रीता जी… नमस्कार…. प्रतिक्रिया व्यक्त करने हेतु आपका आभार….

आर.एन. शाही के द्वारा
February 11, 2011

हिमांशु जी, जो अब तक प्रतियोगिता में किसी ने नहीं किया, वह आपने कर दिखाया । अर्थात सभी प्रतिभागियों को एक सूत्र में पिरोकर मंच पर प्रस्तुत कर सबका परिचय करा दिया, ठीक उसी स्टाइल में, जैसे आर्केस्ट्रा पार्टी का हंसोड़ मंच संचालक अपनी पार्टी के सभी कलाकारों का परिचय कराता है, गवैये हों या बजइये । आपका केरीकेचर भी हो ही गया । मेरी तरफ़ से प्रतियोगिता की शुभकामनाएं स्वीकार करें । होली भी आ रही है, आपसे उम्दा व्यंग्य लेख की उम्मीदें अभी से पाल रहा हूं । बधाई ।

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    नमस्कार शाही जी….. आपका आशीर्वाद मिला…. मै तो धन्य हो गया…. कोशिश रहेगी आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने की … मेरे पोस्ट पर आने और प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपका आभार….

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 11, 2011

मजे हैं हिमांशु जी आपके ……. छुट्टियाँ हैं तो आप भी शेर हो……. बाकी रही बात हमारी तो हम तो जब से इस मंच पर उतरे हैं तभी से सबको संक्षिप्त ही सही…कुछ न कुछ प्रतिक्रिया देते ही हैं……… चाहे व्यस्तता कितनी भी रहे…. और जहां तक 15 फरवरी से पुराने चावलों के रह जाने की बात है तो जहां तक मैं सोचता हूँ…… मैं भी इस मंच से गायब हो जाऊंगा और आप भी….. भले ही आंशिक तौर पर ही ….. और हमारे एक आध ब्लॉग फीचर्ड क्या हो गए गलती से आपने उनको सार्वजनिक रूप से फटीचर कह दिया…… बहुत बढ़िया………. तो अपनी गली के सबसे बड़े लेखक को इस सुंदर व प्रथम व्यंगतमक लेख के लिए हार्दिक बधाई……….

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    जी हाँ पियूष जी १४ फरवरी से उच्च न्यायलय नैनीताल शीतावकाश के बाद खुल रहा है…. इसलिए १४ फरवरी के बाद से मंच पर ऐसी सक्रियता से नहीं रह पाऊंगा लेकिन अपनी उपस्थिति पहले की भांति दर्ज करता रहूँगा…. आपके पोस्ट को फटीचर कहने का मेरा कोई मंतव्य नहीं था…. यह तो लेख को हास्य बनाने का एक प्रयास मात्र था…. अगर आपको या किसी भी अन्य पाठक को मेरी बात से ठेस लगी हो तो मै क्षमा चाहूँगा… प्रतिक्रिया व्यक्त करने हेतु आभार….

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 12, 2011

    हिमांशु जी…… उच्च न्यायालय तो पहले भी खुला ही था……. जब आप पहले लिखते थे….. पर अब न लिखने के कारण दूसरे होंगे…… और जिस तरह आपने अपने लेख को हास्य का पुट देने के लिए फटीचर लिखा वैसे ही हमने अपनी प्रतिकृया को हास्य का पुट देने के लिए अपने ही ब्लॉग को फटीचर कहा……. आशा ही की इन छुट्टियों मे आपके द्वारा की गयी ये मेहनत रंग लाये….. ओर आप प्रतियोगिता जीतें……..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    आपका आभार पियूष जी….

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    पियूष जी मै अब नहीं लिखूंगा ऐसा मैंने नहीं कहा…. मैंने यह कहा है की पहले की तरह अपनी उपस्थिति दर्ज करता रहूँगा…. हाँ अब वह सक्रियता नहीं हो पायेगी जो इन १४ दिनों के अवकाश के दौरान थी…. और अन्य कोई कारण नहीं है…. आपका शुक्रिया….

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 12, 2011

    आप इतने भरोसे के साथ कह रहे हैं की आप आगे भी लिखते रहेंगे तो जरूर कुछ वजह होगी……. पर मुझे नहीं लगता की मैं पहले की तरह लिख पाऊँगा…… अभी नयी व्यस्तताएं आने वाली हैं…… कुछ परीक्षाएँ ओर कुछ ऑफिस की…….तब शायद आपको भी मंच से गायब होना ही पड़े……..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    पियूष भाई आपकी चिंताएं भी जायज़ हैं… लेकिन लाइफ में बैलेंस बनाकर चलना पड़ता है… अब इस मंच पर इतने सारे मित्र बने हैं की फिर फिर लौट कर कौन नहीं आना चाहेगा सब का स्नेह पाने के लिए….

    Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
    February 12, 2011

    हिमांशु जी चिंता न करें…… अपने इन मित्रों को प्रतिक्रियाएं देकर भी हम इनसे जुड़े रह सकते हैं…..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    पियूष जी आपने उचित ही कहा है… और देखिये…. आपका हमारा कम्मेंट कम्मेंट का गेम भी हो गया है…. अब तो तैयार रहिये …. राजकमल जी इस पर भी कुछ लिख ही डालेंगे….

baijnathpandey के द्वारा
February 11, 2011

आदरणीय हिमांशु जी बहुत सही बात कही है आपने …….प्रेम रूपी सागर का जमकर मंथन हो रहा है और इस अमृत का पान कर हम-सब प्रेममय हो रहें है ……….जागरण ने अवश्य हीं स्वागत योग्य कदम उठाया है जिससे हर किसी को कुछ सीखने को मिल रहा है

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 12, 2011

    जी हाँ बैजनाथ जी….. जागरण मंच से बहुत कुछ सिखने को मिला है…. स्नेह बनाये रखने के लिए आभार…….


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