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रूपकुंड: एक रहस्य

Posted On: 10 Feb, 2011 Others में

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गढवाल हिमालय के अन्तर्गत अनेक ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं जिनकी जितनी खोज की जाय उतने ही रहस्य सामने आ जाते हैं। इन आकर्षक एवं मनमोहक स्थलों को देखने के लिये प्राचीन काल से ही अनेक जिज्ञासु एवं पर्यटक यहाँ आते रहे हैं। ऐसा ही एक स्थल है ……. रूपकुंड।



m_RUPKUND

यह स्थल उच्च हिमालय क्षेत्र के अन्तर्गत लगभग १६२०० फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध नंदादेवी राजजात यात्रा मार्ग पर एक चर्चित रहस्यमय स्थान है। यह झील त्रिशूली शिखर (२४००० फीट) में स्थित ज्यूंरागली पहाडी के नीचे १५० फीट ब्यास एवं ५०० फीट की परिधि में अंडाकार आकार में फैली स्वच्छ एवं शांत मनोहारी झील है। इससे रूपगंगा जलधारा निकलती है। ऐसी मान्यता है कि अपने स्वामी गृह कैलाश जाते समय अनुपम सुंदरी हिमवन्त पुत्री नंदादेवी ने बीच मार्ग में स्नान करते एवं श्रृंगार करने के बाद जब अपनी आधी सुन्दर छवि उस कुंड में देखी तो अत्यंत प्रफुल्लित हुई तथा उसने इस कुंड का नाम रूपकुंड रख दिया। अपनी मनोहारी छटा के लिये यह झील जिस कारण अत्यधिक चर्चित है वह है झील के चारों ओर पाये जाने वाले रहस्यमय नरकंकाल अस्थियां विभिन्न उपकरण कपडे गहने बर्तन चप्पल आदि वस्तुऐं।


रूपकुंड के आसपास पडे अस्थियों के ढेर एवं नरकंकालों की खोज सर्वप्रथम वर्ष १९४२-४३ में भारतीय वन निगम के एक अधिकारी द्वारा की गई। लखनऊ विश्वविद्यालय के मानव शरीर रचना अध्ययन विभाग के डा० डी०एन०मजूमदार के द्वारा ये अस्थियां ६०० वर्ष से पहले की प्रमाणित की गई।


अनेक जिज्ञासु-अन्वेषक दल भी इस रहस्यमय रूपकुंड क्षेत्र की ऐतिहासिक यात्रा सम्पन्न कर चुके हैं। भारत सरकार के भूगर्भ वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के एक दल ने भी दुर्गम क्षेत्र में प्रवेश कर अपने विषय का अन्वेषण व परीक्षण किया था।


वर्ष १९५५ में भारत सरकार के मानव शास्त्र विभाग के प्रसिद्ध मानव शास्त्री एवं विभाग के डायरेक्टर जनरल डा०दत्त मजूमदार ने गढवाल पर्वतीय क्षेत्र का व्यापक भ्रमण कर बताया कि यह घटना तीन-चार सौ वर्ष से कहीं अधिक पुरानी है और ये अस्थि अवशेष किसी तीर्थ यात्री दल के हैं। बिटिश व अमेरिका के वैज्ञानिकों ने रूपकुंड क्षेत्र के मानव कंकालों के रहस्यों को सुलझाते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ये कंकाल लगभग ६०० वर्ष पुराने हैं।


रूपकुंड के वैज्ञानिक पहलू को प्रकाश में लाने का श्रेय प्रसिद्ध पर्यटक एवं हिमालय अभियान के विशेषज्ञ एवं अन्वेषक स्वामी प्रणवानन्द को है। स्वामी प्रणवानन्द ने अपने अध्ययन के निष्कर्ष में रूपकुंड में प्राप्त अस्थियां आदि वस्तुऐं कन्नौज के राजा यशोधवल के यात्रा दल के माने हैं जिसमें राजपरिवार के सदस्यों के अलावा अनेक दास-दासियां कर्मचारी तथा कारोबारी आदि सम्मिलित थे। बताया गया है कि हताहतों की संख्या कम से कम तीन सौ होगी। यह झील लगभग १२ मीटर लम्बी १० मीटर चौडी व दो मीटर गहरी है व झील का धरातल प्रायः सर्वत्र समतल प्रतीत होता है।


रूपकुंड रहस्य की ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक आधार पर जांच पडताल के बाद यह निष्कर्ष निकाला जा चुका है कि एक बार नंदादेवी के दोष के कारण कन्नौज के राजा यशोधवल के राज्य में भयंकर अकाल सूखा तथा अनेक प्राकृतिक प्रकोप होने लगे जिससे भयभीत होकर राजा यशोधवल ने नंदादेवी की मनौती की और गढवाल हिमालय में नंदा देवी राजजात हेतु सदल-बल प्रस्थान किया। गढवाल हिमालय के इस पावन क्षेत्र की धार्मिक यात्रा के नियमों एवं मर्यादाओं की घोर उपेक्षा की। राजा अपनी गर्भवती रानी व दास-दासियों सहित तमाम लश्कर दल के साथ त्रिशूली पर्वत होते हुए नंदादेवी यात्रा मार्ग पर स्थित रूपकुंड में पंहुचे। नंदादेवी के दोष के परिणामस्वरुप उस क्षेत्र में अचानक भयंकर वर्षा व ओलावृष्टि हो गई और राजा यशोधवल सपरिवार आदि सभी यात्री दल उस बर्फानी तूफान में फंस गये व दबकर मर गये। अतः ये नरकंकाल व अस्थियां आदि वस्तुऐं उसी समय के बताये गये हैं।

इतिहासकारों एवं वैज्ञानिकों के लिये रूपकुंड रहस्य एक बहुचर्चित विषय है। इस बीच इन पांच-छह दशकों में इस क्षेत्र में जितनी भी खोज की गयी है उसमें विशेषज्ञ एकमत नहीं हो पाये हैं। लेकिन इस निष्कर्ष पर तो अवश्य पंहुचे हैं कि ये नरकंकाल व अस्थियां आदि वस्तुऐं छह-सात सौ वर्ष पुराने हैं।


यह रहस्यमय झील ग्रीष्मकाल वर्षा ऋतु के तीन-चार महीने (जून से सितम्बर तक) बर्फ पिघलने से दिखाई देती है और शेष अवधि में हिमाच्छादित रहती है। आज भी रूपकुंड के आसपास यत्र-तत्र व किनारों पर छुटपुट मानव कंकाल व अस्थियां के टुकडे पडे दिखाई देते हैं लेकिन पर्यटकों अन्वेषकों के आगमन के बाद अब इस क्षेत्र में ये वस्तुऐं धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं।


इस विश्वप्रसिद्ध रहस्यमय रूपकुंड स्थान में पंहुचने के लिये मुख्यतः निम्न मार्ग हैं -

१-कर्णप्रयाग से थराली – देवाल – बाण – गैरोलीपातल – वेदिनी बुग्याल – रूपकुंड (लगभग १५५ किमी)।

२-नंदप्रयाग से घाट सुतोल वाण वेदिनी बुग्याल रूपकुंड।

३-ग्वालदम से देवाल वाण वेदिनी बुग्याल रूपकुंड।

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shailendra Chauhan के द्वारा
September 12, 2014

अगर इस स्थान से इनसे जुडी वस्तुए यात्रीयो के कारन खतम हो रही है तो, सरकार इनका सरक्षण क्यों नहीं करती….

rajkamal के द्वारा
February 10, 2011

प्रिय हिमांशी जी …नमस्कार ! राजपरिवार के ही एक सदस्य की भूल या फिर जिद्द के कारण वोह हादसा हुआ था ….. आपने इतनी मेहनत से इस साडी जानकारों को हमारे सामने रखा उसके लिए आपका आभार ….

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 11, 2011

    राजकमल जी….. आपका हार्दिक धन्यवाद एवं आभार………………..

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 10, 2011

रूपकुंड से जुड़ी रोचक जानकारियों के लिए व वहाँ तक पहुँचने के मार्गों से अवगत करने के लिए शुक्रिया,,,, वास्तव मे उत्तराखंड अपने आप मे ऐसे कई रहस्य समेटे हुए है………

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 11, 2011

    पियूष जी…. देवभूमि उत्तराखंड वाकई में महान है………………

Amit Dehati के द्वारा
February 10, 2011

आदरणीय हिमांशु जी , आपने बहुत ही अच्छी जानकारी दी | बिलकुल मन एकदम प्रफुल्लित हुआ और उस छटा को देखने के लिए मन ब्याकुल हुआ जा रहा है … धन्यवाद !

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 11, 2011

    अमित जी….. प्रतिक्रिया व्यक्त करने हेतु आभार……………..

NIKHIL PANDEY के द्वारा
February 10, 2011

हिमांशु जी नमश्कार . रूप कुंड के बारे में मैंने सुना था पर इतना नहीं .. कभी कभी जब ऐसे विवरण सामने आते है तो मन गर्वित हो उठता है.. कितने अलौकिक स्थल और उनके साथ जुडी तमाम ऐतिहासिक .. अलौकिक घटनाएं और तथ्य . हमारे महान देश का हिसा है.. इस लेख के लिए आभार

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 11, 2011

    आपका भी बहुत बहुत आभार निखिल जी…..

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 10, 2011

श्री हिमांशु जी, मै चातक जी की बातों से पूरी तरह सहमत हूँ..अब देखने की इच्छा हो रही है.. आकाश तिवारी

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 11, 2011

    नमस्कार…………. तिवारी जी……….. धन्यवाद………………………………….

chaatak के द्वारा
February 10, 2011

हिमांशु जी, रूपकुंड के बारे में इतनी अच्छी जानकारी मंच पर शेयर करने का धन्यवाद ! आपने जो कुछ भी बताया उससे इस रूपकुंड को देखने की इच्छा बलवती हो रही है |

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 11, 2011

    चातक जी, नमस्कार……………….. आप अवश्य रूपकुंड के दर्शन कीजिये…………….

Dharmesh Tiwari के द्वारा
February 10, 2011

हिमांशु जी नमस्कार,प्रकीर्त के एक अदभुत दृश्य के बारे में जानकारी देने के लिए धन्यवाद!

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 11, 2011

    धर्मेश जी……….. आभार………………


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