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सच्ची चाहत तो सदा बेजुबान होती है.... (मौन : प्रेम की भाषा)

Posted On: 3 Feb, 2011 Others में

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सभी पाठकों को मेरा प्रेम भरा प्रणाम…. दोस्तों एक बार पुनः मै प्रेम के सम्बन्ध में दो शब्द लेकर आप सभी पाठक गणों के मध्य उपस्थित हूँ और आशा करता हूँ कि पूर्व में जिस प्रकार आप सभी लोगों का स्नेह एवं प्रेम मुझे प्राप्त हुआ है वही स्नेह एवं प्रेम मुझे निरंतर प्राप्त होता रहेगा…. उम्मीद है पूर्व कि भांति आप सभी पाठक गण मुझे अपनी प्रतिक्रियाओं से लेख के विषय में अवगत करते रहेंगे जिससे मै अपनी लेखन शैली में सकारात्मक सुधर करने में सक्षम हो सकूँ…..


दोस्तों मै प्रेम के विषय में इससे पूर्व दो लेख प्रस्तुत कर चूका हूँ लेकिन अभी भी ऐसा महसूस हो रहा है कि प्रेम के संबंध में बहुत कुछ लिखा जाना शेष है….. अभी भी प्रतीत होता है कि बहुत कुछ है जो अनकहा रह गया है…… मेरा तो मानना है कि जब तक पृथ्वी पर मानव का वजूद है तब तक प्रेम का अस्तित्व है….. जीवन के किसी भी स्तर पर प्रेम की आवश्यकता एवं उसके महत्व को नकारा नहीं जा सकता.

प्रेम के संदर्भ में आज तक कोई सार्वभौमिक या सर्वमान्य परिभाषा नहीं लिखी जा सकी है……. कारण प्रेम को शब्दों या भाषा में बांधना असंभव है…. प्रेम असीम है यही असीमता का गुण उसे कहीं बंधने नहीं देता चाहे वो शब्द हों या भाषा….. यही कारण है कि प्रेम को अभिव्यक्त करने की सर्वोत्तम भाषा मौन है…… प्रेम मानव मन का भाव है….. एक ऐसा भाव जो कहा या सुना नहीं अपितु समझा जा सकता है….. महसूस किया जा सकता है….. प्रेम ही मानव जीवन की नींव है….. प्रेम ही हमारे सार्थक एवं सुखमय जीवन का आधार है…. प्रेम को परिभाषित करना असम्भव है.


प्रेम कि परिभाषा वहां से आरम्भ होती है जहाँ समस्त शब्द अर्थहीन हो जाते हैं…. वहीँ अंकुरित होता है प्रेम का बीज…. प्रेम की शब्दों से व्याख्या करना संभव नहीं है…. प्रेम एक मधुर अहसास है…. प्रेम एक सुखद अनुभूति है…. प्रेम का नशा आप अनुभव तो कर सकते हैं लेकिन इस नशे को शब्द रूप देना असंभव है… प्रेम का उन्माद अवर्णनीय है…. प्रेम को हम शब्द रूप देने की कोशिश तो करते हैं…. लेकिन ऐसा करने में हम उसे सीमित कर देते हैं…. जबकि प्रेम तो असीम है…. सर्वत्र है…. यही कारण है कि प्रेम कि भाषा मौन है.

प्रेम एक पवित्र भाव है जो जन्म लेता है हमारी आत्मा में….. ह्रदय की भावनाओं को तो हम व्यक्त कर सकते हैं किंतु यदि हमारे हृदय में किसी के प्रति प्रेम है तो इसकी अभिव्यक्ति नहीं की जा सकती….. कारण प्रेम एक अहसास है जो बेजुबान है. इस सम्बन्ध में किसी शायर की कही चंद पंक्तियाँ याद आ रही हैं …. आप सबके अवलोकनार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ….

आँख तो प्यार में दिल की जुबान होती है….

सच्ची चाहत तो सदा बेजुबान होती है….

प्यार में दर्द भी मिले तो कैसा घबराना….

सुना है दर्द से चाहत जवान होती है….


प्रेम में अदम्य ताकत है…. प्यार की बेजुबान बोली तो जानवर भी समझ लेते हैं…. जिसे प्यार की दौलत मिल जाए उसका तो जीवन के प्रति नजरिया ही बदल जाता है…. प्रेम से भरे व्यक्ति को सारी सृष्टि बेहद खूबसूरत नजर आने लगती है….. प्रेम के अनगिनत रूप हमारे सामने बिखरे पड़े हैं…. यह तो हमारी दृष्टि है…. जो उन्हें देख पाती है अथवा नहीं…. प्रेम ही हमारे जीवन की आधारशिला है.

जहाँ प्रेम है…. वहाँ समर्पण है… जहाँ समर्पण है… वहीँ श्रद्धा है…. जिस प्रकार जिंदा रहने के लिए श्वास जरुरी है…. उसी तरह जीवन के लिए प्रेम आवश्यक है…. सच्चा एवं परिपक्व प्रेम वह है…. जो कि अपने प्रिय के साथ हर कदम साथ रहता है और अहसास कराता है कि मैं हर हाल में तुम्हारे साथ…. तुम्हारे लिए हूँ. प्रेम की व्याख्या हर व्यक्ति अपने तरीके से करेगा…. लेकिन प्रेम … प्रेम ही रहेगा.

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anil devshali के द्वारा
February 10, 2011

पर भाईसाहब मौन रहकर कई बार आदमी फिर मामा ही बनता है . joke apart,  बहुत गंभीरता से लिखते हो भाई. बधाई.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 11, 2011

    अनिल जी, अच्छा मजाक करते हैं आप….. प्रतिक्रिया हेतु आभार……………

nishamittal के द्वारा
February 9, 2011

प्रेम के विषय में गहन अध्ययन के साथ प्रस्तुत विचारों के लिए धन्यवाद.शुभकामनाएं.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 9, 2011

    प्रणाम निशा जी….. आपका आशीर्वाद मिला…. बहुत बहुत आभार…

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 4, 2011

हिमांशु जी…….. प्रेम के सम्बन्ध में वर्णन करना कुछ ऐसा ही है जैसे कोई गूंगा किसी रूप या स्वाद के सम्बन्ध में कुछ कहे…….. वो अपने अनुभव को किसी भी तरह नहीं अभिव्यक्त कर सकता है……… वैधानिक चेतावनी -> इस प्रतिक्रिया से कोई आईडिया ले कर कुछ न लिखे …….. इसके सभी अधिकार सुरक्षित हैं……. किसी भी विवाद का निपटारा हमारे अधिकार क्षेत्र माननीय उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल में होगा……..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 5, 2011

    पियूष जी, आप घबराएँ नहीं….. इस आइडिया पर आपका ही हक है…. मई आपको एक शीर्षक सुझाता हूँ….. गूंगे का गुड है प्रेम…. आप इस विषय पर अवश्य कुछ पोस्ट करें…. आपकी रचना का इन्तजार रहेगा….

baijnathpandey के द्वारा
February 4, 2011

आदरणीय हिमांशु जी प्रेम बड़े हीं निराले अंदाज में परिभाषित किया है आपने …..बहुत सुन्दर आलेख साधुवाद स्वीकारें

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 5, 2011

    नमस्कार पाण्डेय जी, आपका स्नेह मिला…… आभार….

rajeevdubey के द्वारा
February 4, 2011

यदि किसी की आँखों में चमक और चहरे पर मुस्कान दिखे तो उसके ऊपर किसी न किसी रूप में प्यार बरस रहा है., आपका लेख उत्तम है, शुभकामनाएं

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 4, 2011

    शुभकामनाओं एवं पर्तिक्रिया हेतु आपका आभार….. इसी प्रकार स्नेह बनाये रखियेगा……

Devendra Singh Bisht के द्वारा
February 4, 2011

प्यार एक अनुभूति है जो बयां नहीं हो सकती है It can not be described in word.  

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 4, 2011

    आपने उचित ही कहा है…. प्रेम को शब्दों में बांधना….. असंभव….

Devendra Singh Bisht के द्वारा
February 4, 2011

क्या बात है मज़ा आ गया, Beautiful वास्तव मैं यही प्यार है

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 4, 2011

    धन्यवाद देवेन्द्र जी…..

Vipin C. Joshi के द्वारा
February 4, 2011

श्री हिमांशु जी, मेरे अनुसार प्रेम भले ही ढाई अक्षर का हो परन्तु उसकी परिभाषा व व्याख्या ढाई खरब शब्दों में भी कर पाना असंभव है…….प्रेम तो प्रेम है….कहा जाता है के सभी मनुष्य एक ही आत्मा से बने है तथा अंत में उसी आत्मा में समां जाते है…..इसलिए सभी में अपने अक्ष को देखना तथा अपने को ढूँढना ही प्रेम है क्योंकि प्रेम में डूबा व्यक्ति दुसरे में भी खुद को ही खोजता है …….जिस प्रकार भगवान् से प्रेम करने वाला व्यक्ति हर जगह अपने उस भगवान् को देखता है ठीक उसी प्रकार प्रेम करने वाला व्यक्ति हर जगह प्रेम ही खोजता है …..प्रेम ही फेलाता है तथा प्रेम ही करता है….प्रेम में उसके लिए कोई बड़ा या छोटा नहीं…..कोई जाती या बंधन नहीं……कोई समाज..देश या सीमा नहीं….वो तो बस प्रेम करता है ….प्रेम खोजता है…..प्रेम बांटता है……यदि इस प्रकार का व्यक्तित्व हर जगह जो जाये तो इस संसार से अन्याय तथा नफरत दूर हो जाये…..प्रेम को हम कह नहीं सकते …….देख नहीं सकते बस अनुभव कर सकते है…….आओ मिलकर ऐसा प्रेम करे तथा उस भगवान की इस अनोखी दुनिया तथा जीवन को साकार करें……….. हिमांशु जी, एक अच्छे लेख पर आपको बधाई तथा साथ में प्रतियोगिता के लिए आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं —

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 4, 2011

    नमस्कार जोशी जी…. आपने तो प्रतिक्रिया में ही पूरा लेख लिख डाला है…. बहुत बहुत आभार….

valentinedaycontestwinner के द्वारा
February 4, 2011

दो शब्द लेकर आए थे पूरी कथा सुना गए…लेकिन जो कुछ भी कहा अच्छा कहा. 

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 4, 2011

    नमस्कार अज्ञात जी…. आया तो दो शब्द लेकर था लेकिन विषय ही ऐसा है की लिखता ही चला गया….. आपके आगमन पर आभार….

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 4, 2011

श्री हिमांशु जी, प्यार इतनी सुखद अनुभूति है की कोई भी इसकी खूबसूरती बयान नहीं कर सकता सिर्फ महसूस ही कर सकता है… प्यार की अहमियत को दर्शाती दो लाइन लिखूंगा….. ******************************************************* “इस तन्हा जिंदगी में सबकुछ बेगाना सा था, इक तेरा नाम था जो कुछ जाना पहचाना सा था”…. ******************************************************* http://aakashtiwaary.jagranjunction.com आकाश तिवारी

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 4, 2011

    नमस्कार तिवारी जी….. एक बार पुनः आपका आभार व्यक्त करता हूँ…. बहुत सुंदर ये दो पंक्तियाँ कही हैं आपने….. आपके लेखन में एक परिपक्वता झलकती है…. आपसे प्रतिक्रिया मिलना भी एक सुखद अनुभूति है….

vimal chandra bhatt के द्वारा
February 4, 2011

हिमांशु जी — दिनांक ०३-०२-२०११ को प्रेम पर लिखा आपका लेख पढ़ा — आपके हर लेख में कुछ न कुछ ऐसा होता है जिसे जीवन के मूल्यों में हेतु ग्रहण किया जाना आवश्यक है — किसी से प्रेम से बोलने या प्रेमपूर्वक व्यव्हार करने से पहले प्रेम हमारे मन में आता है अर्थात पहला फायदा हमे हुआ — अतः हर पल प्रेम से भरे रहना होगा — जानवर भी प्रेम चाहते हैं — आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं —

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 4, 2011

    भट्ट जी….. नमस्कार….. आप अपना कीमती समय देकर मेरे लेखों का अवलोकन कर उन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं यह मेरे लिए हर्ष की बात है….. आपसे अनुरोध है की इसी प्रकार अपना स्नेह एवं आशीष बनाये रखना….. धन्यवाद….

rajkamal के द्वारा
February 3, 2011

हिमांशु जी ..नमस्कार ! आपने बिलकुल ठीक कहा है की जब तक यह जिंदगी है प्रेम के किसी न किसी रूप में मायने हमारे लिए हमेशा ही रहेंगे … शुभकामनायो सहित

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 4, 2011

    राजकमल जी…. आपका आभार व्यक्त करता हूँ…..

Amit Dehati के द्वारा
February 3, 2011

हाँ हाँ हा हा हा हा हा सचिन जी ………… क्या खूब अंदाजा लगाया /////// बिल्कुल आपने सही फरमाया| मै आपके साथ हूँ. बहुत ही सुन्दर लेख आपने प्रस्तुत किया ….हिमांशु सर वाकई काबिले तारीफ … बहुत अछे शब्दों से लिख को उत्क्रिस्ट किया … कांटेस्ट के लिए शुभकामना !

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    अमित जी…. क्या अंदाज़ा गलत हो गया है….. अगर allrounder हैं तो सचिन ही होंगे….. आपकी मनोबल बढाती और गुदगुदाती प्रतिक्रिया हेतु आभार…. आपको भी शुभकामनायें….

allrounder के द्वारा
February 3, 2011

हिमांशु जी, नमस्कार आपका एक लेख पढ़ा था धन निवेश के सम्बन्ध मैं काफी जानकारी पूर्ण लगा था, मगर प्रेम के विषय पर आपके लगातार बेहतरीन लेख पढ़कर मुझे लगता है आपने धन के साथ मन का भी अच्छा निवेश करके रखा है, एक अच्छे लेख पर एक बार फिर से हार्दिक बधाई !

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    धन्यवाद…. सचिन जी… जीवन में सर्वप्रथम विचारों का निवेश महत्वपूर्ण है….. तभी अन्य निवेशों का कोई लाभ है….

Manish Singh "गमेदिल" के द्वारा
February 3, 2011

सही कहा आपने “प्रेम” एक ऐसा विषय है जिस पर जितना लिखा जाये जितना समझा जाये और जितना समझाया जाये ….. कम ही है…….. लेकिन प्रेम … प्रेम ही रहेगा. हमेशा

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    मनीष जी, धन्यवाद……. वास्तव में प्रेम जैसे विषय पर क्या लिखें क्या न लिखे….. यह स्थिति है….


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