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प्यार करके तबाह हो जाना

Posted On: 2 Feb, 2011 Others में

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प्रिय पाठकों एक बार फिर मै आपके समक्ष जागरण जंक्शन द्वारा आयोजित प्रतियोगिता के क्रम में प्रेम पर एक नया पोस्ट प्रस्तुत कर रहा हूँ. यह मेरा सौभाग्य है की जिस समय जागरण जंक्शन द्वारा यह प्रतियोगिता प्रारंभ की गयी उसी समय से मेरा अवकाश प्रारंभ हुआ है. इस सौभाग्य के कारण मै आप सभी के मध्य इस प्रतियोगिता के विषय प्रेम पर अपने विचारों को प्रकट कर पाने में समर्थ हुआ हूँ. आशा करता हूँ कि आप सभी पाठक गण पूर्व की भांति ही मेरे इस पोस्ट को पढ़ कर अपनी प्रतिक्रियाओं से मुझे अवश्य अवगत करायेंगें.


सेंट ऑगस्टाइन का एक कथन है…… प्यार से हमेशा कोसों दूर रहने से अच्छा है, प्यार करके तबाह हो जाना……….

सेंट वेलेंटाइन को प्रेम के कारण ही मौत कि सजा मिली थी…. श्री श्री रविशंकर जी का कहना है…… अपने में ईश्वर को देखना ध्यान है, दूसरे में ईश्वर को देखना प्रेम है, सर्वत्र ईश्वर को देखना ज्ञान है. प्रेम को कभी भी जाना नहीं जा सकता क्योकि प्रेम ही ईश्वर है और ईश्वर अनंत है…. और जानने का अर्थ है किसी विषय को मन की सीमा में लाना और जैसे ही हम अनंत को इस सीमा में लाने की कोशिश करते हैं उसका अनंत खत्म हो जाता है……. इस प्रकार प्रेम को जाना नहीं जा सकता हाँ इसे अनुभव जरुर किया जा सकता है और यही अनुभव हमें ईश्वर दर्शन कराता है…… यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो मुक्ति के लिए और कुछ करने कि आवश्यकता नहीं….. यही प्रेम आपको मुक्त करा देगा…. यही है…. वास्तविक प्रेम ……इसी प्रकार यदि हमें वास्तव में ईश्वर से प्रेम है तो हमें उससे मिलने के लिए कोई प्रयत्न करने जरुरत नहीं…. हम उसी क्षण मुक्त हो जाएगे.


आज हमने प्रेम प्यार शब्द को खो दिया है….. आजकल किसी से जब प्रेम की बात करो तो उसका अर्थ वासना से लगा लिया जाता है….. प्रेम को अपेक्षा से जोड़ कर देखा जाता है…..प्रेम वस्तुतः भक्ति का ही दूसरा नाम है…. प्रेम के बिना भक्ति नहीं और भक्ति के बिना प्रेम नहीं हो सकता… प्रेम के लिए जरुरी है परमात्मा का नाम और उसके प्रति समर्पण……..और साथ ही जरुरी है सत्संग अर्थात प्रेम कि चर्चा. मीरा ने कहा था – असाधुओं की संगति में नाम होने से तो साधु संगति में बदनाम हो जाना अच्छा…….प्रेम प्रार्थना का प्रथम रूप है…… प्रेम परमात्मा की शिक्षा है.


अगर तुम्हारे पास प्यार है, तो फिर किसी और चीज की जरूरत नहीं और अगर प्यार नहीं है, तो फिर किसी भी चीज के होने का कोई मतलब नहीं – जेम्स एम. बैरी का यह कथन प्रेम को समझने के लिए पर्याप्त है…..प्रेम स्वयं साधन भी है और साध्य भी…. उसी को सब कुछ मिलता है जिसे कुछ नहीं चाहिए, और ये कुछ नहीं चाहना ही ईश्वर को चाहना है….. प्रेम को परिभाषा या शब्दों में बांधना नामुमकिन है….. किन्तु यह तो कहा ही जा सकता है कि प्रेम ज्ञान से ऊपर है.


प्यार……..ढाई अक्षर का छोटा-सा शब्द …… न जाने कितने सारे अर्थ समेटे हुए है…….इस छोटे से शब्द की व्याख्या के संबंध में न जाने कितने ही कवियों… साहित्यकारों …… संत-महात्माओं द्वारा इतना कुछ कहा एवं लिखा जा चुका है कि अब कुछ और कहे या लिखे जाने की कोई गुंजाइश नजर नहीं आती……. फिर भी इसके महत्व एवं अस्तित्व के विषय में लिखे जाने का सिलसिला अनवरत जारी है…. और अनंत तक जारी रहेगा…… प्रेम कि यह बानगी देख कर सेंट ऑगस्टाइन का यह कथन…… प्यार से हमेशा कोसों दूर रहने से अच्छा है, प्यार करके तबाह हो जाना…… सत्य ही प्रतीत होता है.


अंत में कहीं पढ़ी हुई ये चंद पंक्तियाँ आप सबके अवलोकनार्थ प्रस्तुत हैं……

ये मुहब्बत कि बाते हैं उद्धव , बंदगी अपने वश कि नहीं हैं

यहाँ सर देकर होते हैं सौदे आशिकी इतनी सस्ती नहीं हैं

प्रेम वालो ने कब किससे पूछा , किसको पूछू बता मेरे उद्धव

यहाँ दम दम पर होते हैं सिजदे , सर उठाने को फुर्सत नहीं हैं

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29 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajesh के द्वारा
December 13, 2013

सर आपका लेख पढ़ कर अच्छा लगा पर आज के टाइम में लोग प्यार को वासना तक ही सिमित रखे हुए है क्योकि मै एक लड़की को बचपन से ही प्यार करता था पर कभी मैंने उशे बताया नही लेकिन ५-६ सालो के बाद उसने मुझे बोला कि वो मुझे पसंद करती है और प्यार भी.. मै बहुत खुस था हम दोनों कि दोस्ती पुरे एक साल तक चली, मैंने कभी भी उसके साथ सेक्स या कुछ भी गलत करने का ख्याल तक मेरे मन में नही आया और अंत में उशने मुझसे दुरी बना ली और किसी और को अपना दोस्त बना लिया…मुझे मेरे दोस्तों ने बताया कि आज के टाइम में प्यार नही आकर्षण होता है उसकी इश्चाए पूरी नही हुई इसलिए उसने तुझे छोड़ दिया..मुझे ज्यादा तकलीफ ईश बात से होती है कि लोग झूठ बोलकर अपने प्रेम के जाल में फसाते है और मतलब निकले तो भी और ना निकले तब भी अंत में छोड़ देते है…मुझे आज भी उसकी यादे परेसान करती है और हर दिन मुझे ऐसा महसूस होता है कि ये कल कि ही बात हो……

Alka Gupta के द्वारा
February 9, 2011

हिमांशु जी , आपका यह लेख भी बहुत अच्छा है! इस ढाई अक्षर में इतनी व्यापकता है की अवर्णनीय है !

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 9, 2011

    अलका जी. नमस्कार…. प्रतिक्रिया हेतु आभार….

pankaj bhushan pathak के द्वारा
February 3, 2011

बेहतरीन लेख है ….प्रेम की कोई परिभासा नही होती

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    पंकज जी ….. बहुत बहुत धन्यवाद….

Shailesh Kumar Pandey के द्वारा
February 3, 2011

एक जटिल विषय पर सुन्दर लेख के लिए बधाई, और प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं प्रेम की माप का कोई मापक नहीं है, ये सापेक्ष है | ————————————————————– “Gravitation cannot be held responsible for people falling in love.” :- Albert Einstein “Put your hand on a hot stove for a minute, and it seems like an hour. Sit with a pretty girl for an hour, and it seems like a minute. That’s relativity” :- Albert Einstein

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    धन्यवाद पाण्डेय जी, बहुत सुंदर उक्तियों से सजी….. आपकी यह सुंदर प्रतिक्रिया……

Nikhil के द्वारा
February 3, 2011

उत्कृष्ट लेख के लिए बधाई.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    निखिल जी, आभार………………….

Vipin C. Joshi के द्वारा
February 3, 2011

हिमांशु जी प्रेम की भावना पर आपका लेख बहुत ही अच्छा लगा ……लगता है जेसे की आप आजकल प्रेम में ही डूबे हुए नज़र आ रहे हो…….बहुत प्यार भरा लेख……आपको बधाई तरह साथ में इस प्रतियोगिता के लिए भी बहुत -२ शुभकामनाएं…..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    धन्यवाद विपिन जी आपकी शुभकामनाओं एवं प्रतिक्रिया हेतु…….

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    धन्यवाद तिवारी जी….. आपके स्नेह एवं उत्साहवर्धन के लिए.

vimal chandra bhatt के द्वारा
February 3, 2011

हिमांशु जी आप द्वारा प्रेम पर लिखा गया लेख पढ़कर यह महसूस हुआ की आप वास्तविक प्रेम से वाकिफ हैं — आपके विचारों से पूर्णतया सहमत हूँ — आज जिस रूप में लोग प्रेम को देख रहें हैं वह ओर्जिनल फूल की तरह है जो सुबह खिला और शाम को मुरझा गया — वास्तविक प्रेम कागज का फूल है जिसे जीवन भर सभांल के रखा जा सकता है — अतः ईश्वर से प्रेम ही सच्चा प्रेम है — यदि शारीरिक रूप से प्रेम करना है तो स्वयं से प्रेम करना ही सर्वोतम है — अपनी हेल्थ — अपने मन व अपने विचारों का हमें ध्यान रखना होगा —- इन्ही से प्रेम करना होगा —

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    धन्यवाद विमल जी….. आपका कथन बिलकुल सही है…..

Devendra Singh Bisht के द्वारा
February 3, 2011

तुम्हारे विचार प्यार पर इन डिटेल मैं समझ नहीं आये कृपया करके सरल भाषा मैं समझें और लिखे स्पस्ट रूप मैं. जय वैलेंटाइन देवता की .

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    बिष्ट जी….. मैंने प्रयास किया था की लेख स्पष्ट हो…. यदि फिर भी कोई बात समझ में न आ पाई हो…. तो कृपा करके निःसंकोच पूछें….कोशिश करूँगा स्पष्ट करने की….

nishamittal के द्वारा
February 3, 2011

हिमांशु प्रेम की भावना पर आपके दोनों लेख अच्छे विचार प्रदान करते हुए.बधाई.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    धन्यवाद निशा जी,,,,,, आपके सहयोग एवं प्रेम के लिए……साभार.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
February 2, 2011

बहुत खूब हिमांशु जी………. बार बार लगातार ………. कहाँ से ला रहे हैं इतना प्रेम……………. सुंदर लेख पर बधाई……..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 3, 2011

    पियूष जी, धन्यवाद, अब आपने इतनी अपेक्षाएं राखी हैं तो प्रयास तो करना ही पड़ेगा….

rajkamal के द्वारा
February 2, 2011

आपके स्नेह और प्यार का आभारी हूँ …..जोकि आपने प्यार पर दार्शनिक तरीके से अपने विचार रखे है ….इस प्रतियोगिता के लिए बहुत -२ शुभकामनाएं

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 2, 2011

    राजकमल जी….. आपको साधुवाद…. साभार.

February 2, 2011

Himaanshu jee sundvichaar, dua hai ki aap ye contest jaroor jeeten.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 2, 2011

    आपने ऐसे आशीर्वचन कहे….. मानो जीत ही गए….

Deepak Sahu के द्वारा
February 2, 2011

सुंदर प्रस्तुति एक बार फिर की अपने महोदय जी बधाई! http://deepakkumarsahu.jagranjunction.com/ दीपक

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 2, 2011

    दीपक जी….. आपका असीम आभार

allrounder के द्वारा
February 2, 2011

हिमांशु जी, एक बार फिर से प्यार पर इतने प्यारे और सशक्त विचार लिखने के लिए बधाई !

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 2, 2011

    धन्यवाद…… आपके सहयोग एवं प्यार के लिए…… इसी प्रकार से प्रेम बनाये रखियेगा…..


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