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गाँधी के सपनों का भारत

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mahatma-gandhi_1

….आज हम एक बार फिर महात्मा गाँधी जी के शहीद दिवस पर उनको याद कर रहे हैं….
….बातों और भाषणों में हम गाँधी जी की शिक्षाओं को एक बार याद कर लेते हैं….
….और यह सब हम एक तोते की भांति रटी रटाई बात इस अवसर पर करने के आदि हो चुके हैं….
….इन बातों को हम अपने भाषणों .. अपने निबंधों.. अपनी कविताओं में सुविधानुसार प्रयोग कर लेते हैं….
…. इससे ज्यादा गाँधी जी का हमारे जीवन में महत्व दिखलाई नहीं पड़ता….

mahatma-gandhi-samadhi

….क्योंकि यदि गाँधी विचारधारा हिंदुस्तान में महत्व रखती….

….तो जन सामान्य पर इसकी कम से कम धूल तो अवश्य दिखती….

….आज गाँधी किसी की आलोचना का केंद्र हैं तो किसी के आदर्श….


….लेकिन गाँधी की वर्तमान भारत में प्रासंगिकता से इंकार नहीं किया जा सकता….

gandhi

….इस देश का दुर्भाग्य है की हम अपने पथ प्रदर्शकों को दीवारों पर तो सजा लेते हैं….
….लेकिन जीवन में उतारने में नाकाम साबित होते हैं….
….अगर गाँधी, गाँधी टोपियों से उतरकर नेताओं के दिमागों में घुस पाने में कामयाब होते….
….तो भारत के सार्वजानिक जीवन जीने वाले लोग इतने कलुषित न होते….
….गाँधी अगर सिर्फ पुस्तक का पाठ न होते….
….तो भारत की ममता आज इस कदर कराह न रही होती….
….गाँधी अगर सिर्फ दीवारों पर सजी तस्वीर न होते….
….तो इस देश में गरीब तिल तिल को मरने को मजबूर न होता….
….गाँधी अगर सिर्फ भाषणों का विषय न होते….
….तो इस देश के किसान इस तरह आत्महत्या करने को विवश न होते….
….यह हिन्दुस्तानियों का दुर्भाग्य है कि हमने गाँधी को सिर्फ और सिर्फ….
….टोपियों..पुस्तकों..दीवारों..और..भाषणों.. में ही जीवित रखा है….
….आवश्यकता है गाँधी को जन जन में.. स्वयं में जीवित रखने की….
….तभी गाँधी के सपनों के भारत का नव निर्माण होगा….
….गाँधी क्या थे.. क्या नहीं.. यह विवाद का विषय होगा….
….लेकिन महतवपूर्ण यह है कि वे निर्विवाद रूप से दृष्टा थे….
….उनकी इस शक्ति का प्रयोग हम भारत को विश्व का सिरमौर बनाने हेतु कर सके….
….यही राष्ट्रपिता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी….
….जय हिंद….

gandhi-funeral-procession

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka Gupta के द्वारा
January 31, 2011

हिमांशु जी , गांधी जी के आदर्श और उनके सिद्धांत बस दीवारों की ही शोभा बन कर रह गए हैं……विचार करना बहुत आवश्यक और महत्त्वपूर्ण हो गया है आज ! अच्छी प्रस्तुति ! धन्यवाद

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 1, 2011

    प्रणाम अलका जी, धन्यवाद.

roshni के द्वारा
January 31, 2011

हिमांशु जी आज गाँधी जी बस किताबों तक ही सीमित है ….और कही भी उनके आदर्शो को जीवन में उतारने के लिए किसी भी प्रकार की शिक्षा नहीं दी जाती …..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 1, 2011

    रौशनी जी, नमस्कार, प्रतिक्रिया हेतु आभार.

abodhbaalak के द्वारा
January 31, 2011

Himanshu bhai Gandhi ji aajke yug me utne hi prasangik aur mahtv rakhte hain jinte …. पर क्या करेn, की आजे rajneta aur rajneeti hi ka star kahan pahunch gaya hai, agar wo aaj hote to shayad unko ek baar phir se aandolan karna padta apne hi … http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 1, 2011

    नमस्कार अबोध जी निश्चित ही आज फिर एक आन्दोलन की जरुरत है…..

Amit Dehati के द्वारा
January 31, 2011

हिमांशु जी नमस्कार ! मैं आपका हार्दिक दिल से धन्यवाद देना चाहूँगा………आपने एक महान युग+पुरुष की याद को तारो ताज़ा किया ……. अच्छे विषय पर चर्चा के लिए धन्यवाद ! कृपया मुझे visit करके अपना विचार व्यक्त करें ! http://amitdehati.jagranjunction.com

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 1, 2011

    आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद अमित जी….

AMIT KR GUPTA के द्वारा
January 31, 2011

हिमांशु जी नमस्कार ,पहली बार आपका लेख पढ़ा . अति सुन्दर लेख. गाँधी के परिकल्नाओ का भारत आज का भारत नहीं हैं. गाँधी भ्रष्टाचार मुक्त भारत चाहते थे लेकिन आज का भारत भ्रष्टाचार युक्त भारत हैं. आज राजनीतक मूल्य क्षीण हो गए हैं. गरीबी अमीरी की खाई बढ़ गयी हैं. भ्रष्टाचार ने अपनी पकड़ हर जगह मजबूत कर ली हैं. मैंने कुछ लिखे हैं यदि समय मिले तो मेरे लेख पढ़कर अपने शिकायतों और सुझाव से मुझे अवगत करावे. http://www.amitkrgupta.jagranjunction.com

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 1, 2011

    धन्यवाद अमित जी, अवश्य ही आपके विचारों को पढ़कर उन पर यथा उचित टिप्पणी देने का प्रयास करूँगा….

nishamittal के द्वारा
January 31, 2011

हिमांशु जी,गाँधी का अनुसरण तो उनका नाम लेकर सत्ता सम्भालने वाले भी सिर्फ नारों,चित्र प्रदर्शनियों में करते हैं.वैचारिक दृष्टिकोण से कुछ भिन्नता होने पर भी उनकी महानता को सबका प्रणाम.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 1, 2011

    आपका कथन उचित है निशा जी…. वैचारिक भिन्नता अलग बात है लेकिन गाँधी जी के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है….

rajkamal के द्वारा
January 30, 2011

प्रिय हिमांशु जी …… आप जैसे ब्लोगर कम जागरूक नागरिक धन्य है जोकि नेतायों जैसे अपने फ़र्ज़ को तो अंजाम नही देते है ….. यहाँ पर लिखा एक लेख बहुतो के दिल और दिमाग पर असर डालता है ….. इस लिहाज से आप सभी सराहना के पात्र है ….. सच कहूँ तो आप के लेख से ही मुझको इस दिन के बारे में याद आया …… गाँधी जी नोटों पर हमको बहुत ही अच्छे लगते है और रहेंगे ….. लेकिन गाँधी जी ने इस धरती पर वोह -२ काम किये है जिनको की कोई विरला इतिहास पुरुष ही कर सकता है ….. अगर नेतायों पर नही तो आम जनता पर तो उनका प्रभाव रहती दुनिया तक रहेगा ही …. सुंदर लेख पर मुबारकबाद

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    February 1, 2011

    राजकमल जी , अपने विचारों से अवगत कराने के लिए एवं टिपण्णी प्रस्तुत करने हेतु धन्यवाद .

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
January 30, 2011

हिमांशु जी…….. इन पंक्तियों को पढ़कर ऐसा लगा जैसे पहले कभी पढ़ीं हैं………. .यह हिन्दुस्तानियों का दुर्भाग्य है कि हमने गाँधी को सिर्फ और सिर्फ…. ….टोपियों..पुस्तकों..दीवारों..और..भाषणों.. में ही जीवित रखा है…. ….आवश्यकता है गाँधी को जन जन में.. स्वयं में जीवित रखने की…. ….तभी गाँधी के सपनों के भारत का नव निर्माण होगा…. एक बार फिर खुबसूरत पंक्तियों से सजे सुन्दर लेख के लिए बधाई………..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    January 30, 2011

    पियूष जी नमस्कार, अवश्य ही ये पंक्तियाँ आपने पढ़ी होंगी…… क्योंकि यह पोस्ट मै पूर्व में भी लिख चुका था आज एडिट कर दोबारा पोस्ट किया है…. आपको अच्छा लगा इसके लिए आभार…..

October 8, 2010

हिमांशु जी…….. ….अगर गाँधी, गाँधी टोपियों से उतरकर नेताओं के दिमागों में घुस पाने में कामयाब होते…. ….तो भारत के सार्वजानिक जीवन जीने वाले लोग इतने कलुषित न होते…. ….गाँधी अगर सिर्फ पुस्तक का पाठ न होते…. ….तो भारत की ममता आज इस कदर कराह न रही होती…. ….गाँधी अगर सिर्फ दीवारों पर सजी तस्वीर न होते…. हर एक पंक्ति वर्त्तमान व्यस्था पर चोट करती है…………….. अच्छे लेख के लिए हार्दिक बधाई………………

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    October 11, 2010

    निश्चय ही अगर हम गाँधी जी को व्यवस्था में समाहित कर पते तो देश की यह बदहाली नहीं होती. उत्साह वर्धन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद.


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