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साहस : सही निर्णय लेने में सहायक

Posted On: 28 Nov, 2010 Others में

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साहस पर मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है और साहस का अभाव होने पर ही भय, कायरता मन को आक्रांत करती है। साहस के परिपक्व होने पर वही व्यक्ति, जो पहले अपने आपको कायर समझा जाता था, शौर्य एवं पराक्रम के कारनामें कर लोगों को चकित कर देता है। साहस मनुष्य के जीवन को जीवंत बनाता है।

इससे यह प्रमाणित होता है कि मनुष्य के स्वभाव में आमूल परिवर्तन करना संभव है। जब आप भय, संदेह निराशा से ग्रस्त मनःस्थिति में हों, तब आप सही निर्णय नहीं कर सकते हैं। स्वस्थ मस्तिष्क सही निर्णय लेने में सहायक होता है।

उचित एवं ठोस निर्णय केवल उसी समय किया जा सकता है, जब मस्तिष्क सही कार्यकारी स्थिति में हो, वह निराशा, क्रोध, भय, द्वेष से घिरकर अंधकारमय न हो।

भय तथा चिन्ताग्रस्त मनःस्थिति में कभी किसी महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय नहीं करना चाहिए। जब मन निर्मल, सन्तुलित, शांत हो उस समय जो योजनाएं बनाई जाएं- केवल उन्हीं को क्रियान्वित करने का प्रयत्न करें।

भय, क्रोध आदि के आवेग होने पर मानसिक शक्तियां बिखर जाती हैं। उस समय मन एकाग्र न रहने के कारण निर्णय गलत होते हैं। अतः साहसी बने….. अपने मन को एकाग्र करें…. और शांत चित्त से निर्णय लें।



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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 18, 2010

हिमांशु जी……… एक संक्षिप्त किन्तु बेहतरीन लेख के लिए हार्दिक बधाई………

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 19, 2010

    क्या बात है पियूष जी बड़े दिनों बाद?

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
December 1, 2010

प्रिय श्री हिमांशु भट्ट जी, मैं आपकी इस बात का तहे दिल से समर्थन करता हूँ कि —– साहसी बने….. अपने मन को एकाग्र करें…. और शांत चित्त से निर्णय लें। और आपकी ही बात को दोहराता हूँ कि अशांत मन से लिया निर्णय कभी सही नहीं हो सकता । सुंदर रचना । अरविन्‍द पारीक

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 11, 2010

    धन्यवाद अरविन्द भाई……. आपकी सुंदर प्रतिक्रिया हेतु……

syeds के द्वारा
December 1, 2010

संक्षिप्त मगर पूर्ण, कम शब्दों में ही आपने सारी बातें कह दी. खूबसूरत लेख. http://syeds.jagranjunction.com

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 11, 2010

    THANKS FOR YOUR COMMENTS…….

Aakash Tiwaari के द्वारा
November 29, 2010

श्री हिमांशु जी, क्या बात है आजकल मै जिस दिक्कत में रहता हूँ उससे निकलने का आप बहुत ही सहज और सरल रास्ता मुझे दिखा देते है….ये बिलकुल सत्य है मै यूँ ही नहीं कह रहा..वास्तविकता यही है मुझे इस तरह के सुझाव की बहुत आवश्यकता थी…धन्यवाद…. आकाश तिवारी

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 11, 2010

    तिवारी जी……आपको मेरे लेखन से कुछ प्राप्त होता है तो यह मेरे लिए सम्मान की बात है.

abodhbaalak के द्वारा
November 29, 2010

हिमांशु जी बहुत थोड़े में आपने बहुत ही ज्ञान की बात कह डाली है, सच तो ये है की हमारा मस्तिष्क ही हमारे कार्य कलापों को काफी सीमा तक नियंत्रित करता है और जैसा हम उस समय सोचते हैं वही प्रितिक्रिया का संभावना अधिक होती है सुन्दर रचना के लिए बंधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 11, 2010

    धन्यवाद अबोध जी……. आपका कहना बिलकुल सही है की हमारा मस्तिष्क ही हमारे कार्य कलापों को काफी सीमा तक नियंत्रित करता है….. अतः जितना साहसी हम उसे बनायेंगे उतना ही वह सक्षम होगा.

November 29, 2010

अपने बहुत कम लिखकर भी बहुत काम की बातें कह दी हैं हिमांशु जी. बस इन्हें गहरे से समझने की जरूरत है.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 11, 2010

    प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद रतूड़ी जी…….

nishamittal के द्वारा
November 29, 2010

अछे व्यवहारिक शिक्षा हिमांशु जी. सोच समझ कर लिया गया निर्णय हितकारी होता है.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 11, 2010

    जी हाँ निशा जी बिलकुल ठीक कहा आपने…… प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद.

alkargupta1 के द्वारा
November 29, 2010

व्यक्ति के जीवन में लिया गया कोई भी  निर्णय  उसके कार्य की सफलता व असफलता का द्योतक है …….. उसमें शांत व स्थिर चित्त के साथ साहसी होकर निर्णय लें………… एक अच्छी सीख देती हुई श्रेष्ठ रचना 

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    December 11, 2010

    THANKS ALKA JI FOR YOUR SUPPORTIVE COMMENTS.


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