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पाहन पूजे हरि मिले

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….अब अयोध्या पर अदालत का फैसला आने के बाद….

….सभी चैन की सांस ले रहे हैं….

….लेकिन मुद्दा तो यह है कि….

….आदमी ऐसे किस ईश्वर की पूजा करता है….

….जिसकी जमीन के विवाद के कारण….

….उसे अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ता है….

….इन्सान अपने व्यक्तिगत विवादों के लिए अदालत जाये ये तो समझ आता है….

….पर भगवानो के बीच विवाद खड़ा कर उसे अदालत में घसीटा जाये….

….यह समझ के परे है….

….जब सारी सृष्टि ही उस परम पिता की है….

….तो मालिकाना हक़ अदालत कैसे तय कर सकेगी….

….यह समझ से परे है….

….जो लोग ईश्वर के नाम पर ये सब काम कर रहे हैं….

….निश्चित ही वे न तो ईश्वर के सत्य से परिचित हैं….

….न ही वे उसके होने पर विश्वास करते हैं….

….ये सब धर्म के तथाकथित ठेकेदार….

….इन्सान को इन्सान से अलग कर रहे हैं….

….और ईश्वर के प्रेम के सन्देश का निरादर कर रहे हैं….

….कोई भी व्यक्ति ईश्वर का न्यायाधीश नहीं हो सकता….

….और सारी जमीनों का मालिक एक वो ही ईश्वर है….

….हम उसका हक़ तय नहीं कर सकते….

….वो ही हमारा हक़ तय करता है….

….हाँ यह फैसला हिन्दू और मुस्लिमो का हक़ जरूर तय करता होगा….

….क्यूंकि सम्प्रदाय ईश्वर का नाम तो लेते हैं लेकिन ईश्वर को….

….उसके प्रेम को नहीं जानते….

….अगर जानते….

….तो अदालत नहीं जाते….

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

daniel के द्वारा
October 4, 2010

हिमांशु जी ! १ व् २ अक्तूबर की प्रतिक्रियाओं के उत्तर आपने अभी तक नहीं दिए हैं …………..

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    October 11, 2010

    इस ओर ध्यान दिलाने के लिए आपका शुक्रिया डेनियल जी…… धन्यवाद.

Aakash Tiwaari के द्वारा
October 2, 2010

हिमांशु जी….. आपका ये लेख वाकई में सच्चाई के दर्शन करता है……..काश हम जनता भी इस बात को समझ पाते…….. आकाश तिवारी aakashtiwaary.jagranjunction.com

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    October 3, 2010

    आपने बिलकुल सही कहा है…. हम ईश्वर को समझ पाने में विफल रहे हैं….. प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद .

Rakesh के द्वारा
October 2, 2010

ठीक बात है की जब सारी सृष्टि ही उस परम पिता की है, तो मालिकाना हक़ अदालत कैसे तय कर सकेगी. एक दम बढ़िया.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    October 11, 2010

    राकेश जी उस परम पिता की सृष्टि को हम समझ पायें……. ऐसी दृष्टि की जरुरत है……. धन्यवाद.

NIKHIL PANDEY के द्वारा
October 1, 2010

हिमांशु जी सत्य है ,, धर्म के नाम पर ठेकेदारी ने धर्म को भी बदनाम कर दिया है और इतनी विषमता पैदा कर दिया है …….सटीक अभिव्यक्ति

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    October 11, 2010

    निखिल जी ….. सर्वप्रथम आपकी प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद……. वैसे तो धर्म को बदनाम कोई कर नहीं सकता….. लेकिन मुझे प्रतीत होता है कि मनुष्य द्वारा विवेक का प्रयोग सीमित कर देने के कारण यह स्थिति पैदा हो गई है.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
October 1, 2010

कृपया छूट करता है को चोट करता है पढ़ें…………

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    October 11, 2010

    जी पियूष जी….. धन्यवाद.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
October 1, 2010

यह फैसला हिन्दू और मुस्लिमो का हक़ जरूर तय करता होगा क्यूंकि सम्प्रदाय ईश्वर का नाम तो लेते हैं……………….. एक एक वाक्य धर्मान्धता से ग्रसित समुदायों पर छूट करता है………. बहुत खूब सर………

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    October 11, 2010

    आपकी उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया हेतु बहुत बहुत धन्यवाद…….. हाँ यह बिलकुल सत्य है…… धर्म और सम्प्रदाय दोनों अलग अलग हैं…… यह समझना बहुत जरुरी है.


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