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कितने बेबस हैं हम.

Posted On: 19 Aug, 2010 Others में

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कपकोट, बागेश्वर : एक दर्दनाक हादसा
                          दिनांक १८ अगस्त २०१० : जब सारा भारतवर्ष रक्षाबंधन एवं रमजान के त्योहारों के माहोल मे डूबा है तब उत्तराखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र में बादल फटने से १८ छोटे छोटे बच्चों की मृत्यु की खबर दिल को झकझोर के रख देती है. शायद ही कोई ऐसा निर्मम ह्रदय होगा जो इस करूँ त्रासदी को सुन कर या टी.वी. पर देख कर रोया नहीं होगा. उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील के सुदूरवर्ती गावं तप्तकुंड मे जब बच्चे एक विद्यालय में पढाई कर रहे थे तभी अचानक बादल फटने से हुई भरी वर्षा के कारण अचानक मलबा आने से यह हादसा घटित हुआ. इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि हादसे में मारे गए अधिकतर बच्चे ५ वर्ष या इससे कम आयु के थे. बड़ी क्लास के बच्चे एवं टीचर तो जान बचाने में सफल हो गए लेकिन मारे गए बच्चे इतने मासूम थे कि वे समझ ही नहीं पाए कि क्या घटने वाला है. इस घटना के बाद स्कूल के टीचर भी बच्चों को ना बचा पाने के अफ़सोस में फफक फफक के रो पड़े. यूँ तो उत्तराखंड में अनेक प्राकृतिक आपदाओं का इतिहास रहा है और उत्तराखंड के वासियों ने अनेक आपदाओं का साहस के साथ सामना किया है लेकिन इस घटना ने ह्रदय पर जो आघात किया है उसे शब्दों में व्यक्त करना मेरे लिए असंभव है.
                        बच्चों को ना बचा पाने कि जो बेबसी टीचरों के रोने से झलक रही थी वही बेबसी कहीं ना कहीं हमारे अन्दर भी झलकती है. प्रकृति के आगे हमारी बेबसी का उदाहरण है यह घटना, लेह के हादसे के बाद यह हादसा एक सबक है हम सब के लिए कि हम प्रकृति के साथ जो भी कर रहे हैं उसे ना कर प्रकृति की IMPORTANCE को SAMJHE .

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Vipin Joshi के द्वारा
September 16, 2010

वाकई सर, बहुत ठीक कहा अपने

Rakesh के द्वारा
August 28, 2010

vastav me ek hradya vidarak ghatna hai. ye.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    October 17, 2010

    THANKS FOR COMMENTS

Aakash Tiwaari के द्वारा
August 20, 2010

मै तो सिर्फ इतना कहूँगा ” इनकी पथराई आँखों ने क्या नहीं दुःख उठाया है, पूंछो तो ऐ दुनिया वालों मत सोंचो की वो पराया है..” बहुत ही अच्छा लिखा है आपने..आकाश

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    August 21, 2010

    बहुत सुंदर प्रतिक्रिया है. आपकी प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. इसी प्रकार भविष्य में भी मनोबल बढ़ाते रहिएगा. धन्यवाद………….

Akhilesh Ghildiyal के द्वारा
August 19, 2010

Very true……. Irrespective of the fact that we have logics and reasons behind every single thing happening in this Universe….. Still we are so clueless when it comes on Nature. Can’t fight against Natural Calamities.. May those holy souls rest in peace. May God give courage to their dear ones to overcome this disaster.

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    August 20, 2010

    THANKS FOR YOUR COMMENTS.

Piyush Pant के द्वारा
August 19, 2010

पूरी घटना को पूरी जीवन्तता से वर्णित किया गया है. आपका कथन बिलकुल सही है इन आपदाओं के सामने हमारा पूरा विकास और विज्ञानं का अभिमान खंडित हो जाता है…………. उन बच्चों की आत्मा की शांति के लिए हम केवल प्रार्थना ही कर सकते है………. अच्छे लेखन के लिए धन्यवाद …………………….

    HIMANSHU BHATT के द्वारा
    August 20, 2010

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद. भगवान पीड़ित परिवारों को सांत्वना प्रदान करे.


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